जिस प्रकार अग्निधुएँ से ढक जाती है, दर्पणमल से आच्छादित हो जाता है, और जिस प्रकार गर्भउल्ब(गर्भावरण) से ढका रहता है, उसी प्रकार यह ज्ञानकाम द्वारा आच्छादित हो जाता है।
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