यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।
जो-जो श्रेष्ठ पुरुष आचरण करता है, अन्य लोग भी उसी का अनुसरण करते हैं। वह जिस आचरण को प्रमाण(आदर्श) के रूप में स्थापित करता है, समस्त लोक उसी का अनुसरण करता है।
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