कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि।।
क्योंकि जनक आदि राजर्षियों ने भी कर्म के द्वारा ही परम सिद्धि प्राप्त की थी। और लोकसंग्रह(लोककल्याण तथा लोगों को धर्ममार्ग में प्रवृत्त रखने) की दृष्टि से भी तुम्हें कर्म करना चाहिए।
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