अतः तुम आसक्ति का त्याग करके निरन्तर अपने कर्तव्य कर्म का भली-भाँति पालन करो; क्योंकि आसक्ति रहित होकर कर्म करने वाला पुरुषपरम पद को प्राप्त कर लेता है।
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