यज्ञ से संतुष्ट हुए देवता तुम्हें इच्छित भोग प्रदान करेंगे। किन्तु उन देवताओं द्वारा दिए गए पदार्थों को उन्हें अर्पित किए बिना जो मनुष्य स्वयं भोगता है, वह निश्चय ही चोर कहलाता है।
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