अर्जुन उवाच स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव।
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्।।
अर्जुन ने कहा—हे केशव!समाधि में स्थित और स्थितप्रज्ञ(जिसकी बुद्धि स्थिर हो गई है) पुरुष का लक्षण क्या है? वह स्थितबुद्धि पुरुष कैसे बोलता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता-फिरता है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।