श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि।।
जब तुम्हारी बुद्धि, विविध श्रुतियों(परस्पर भिन्न प्रतीत होने वाले शास्त्रीय मतों) से विचलित होना छोड़कर, समाधि में निश्चल और अचल हो जाएगी, तब तुम योग को प्राप्त हो जाओगे।
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