यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च।।
जब तुम्हारी बुद्धिमोहरूपी दलदल को पार कर जाएगी, तब तुम जो कुछ सुनने योग्य है और जो सुन चुके हो, उन सबके प्रति वैराग्य को प्राप्त हो जाओगे।
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