कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्।।
समत्वबुद्धि से युक्त मनीषीजनकर्मों से उत्पन्न होने वाले फल का त्याग करके, जन्मरूप बन्धन से मुक्त हो जाते हैं और समस्त दुःखों से रहित परम पद को प्राप्त होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।