भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते।।
भोग और ऐश्वर्य में आसक्त तथा उस पुष्पित वाणी द्वारा जिनका चित्त हर लिया गया है, ऐसे लोगों की निश्चयात्मक(दृढ़ और एकाग्र)बुद्धिसमाधि(आत्मनिष्ठा) में स्थिर नहीं हो पाती।
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