हे पार्थ! यह सांख्य(आत्मतत्त्व के ज्ञान) के विषय में तुम्हें बुद्धि कही गई। अब योग(कर्मयोग) के विषय में इस बुद्धि को सुनो, जिसके द्वारा युक्त होकर तुम कर्मबन्धन से मुक्त हो जाओगे।
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