यह आत्माअव्यक्त(इन्द्रियों से ग्रहण न की जा सकने वाली), अचिन्त्य(मन की कल्पना से परे) और अविकार्य(जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होता) कही गई है। अतः इस प्रकार आत्मा के स्वरूप को जानकर तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
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