वर्णसंकर(सामाजिक एवं पारिवारिक व्यवस्था का विघटन)कुल का नाश करने वालों और उस कुल—दोनों के लिए नरक का कारण बनता है। क्योंकि पिण्डदान और जलतर्पण आदि क्रियाओं के लुप्त हो जाने से उनके पितर भी पतित हो जाते हैं।
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