हे कृष्ण! जब अधर्म की वृद्धि होती है, तब कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं। और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर(सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था का मिश्रण एवं विघटन) उत्पन्न होता है।
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