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भगवद गीता • अध्याय 1 • श्लोक 34
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन। अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते।।
हे मधुसूदन! मैं इनका वध करना नहीं चाहता, चाहे ये मुझे मार ही डालें। तीनों लोकों के राज्य के लिए भी मैं इन्हें मारना नहीं चाहता, फिर केवल पृथ्वी के राज्य के लिए तो कहना ही क्या है।
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