न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च।
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा।।
हे कृष्ण! मैं न तो विजय की इच्छा करता हूँ, न राज्य की, और न ही सुखों की। हे गोविन्द! हमें राज्य से क्या प्रयोजन है, अथवा भोगों और जीवन से ही क्या लाभ है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।