श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि।
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्।।
उन्होंने श्वसुरों तथा स्नेहीजनों को भी दोनों सेनाओं में उपस्थित देखा। उन समस्त बन्धुओं को युद्ध के लिए खड़ा देखकर, कुन्तीपुत्र अर्जुन(कौन्तेय) करुणा से भर उठे।
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