सञ्जय उवाच
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्।।
संजय ने कहा—
तब राजा दुर्योधन ने पाण्डवों की सुव्यवस्थित युद्ध-सेना को देखकर, आचार्य द्रोण के पास जाकर यह वचन कहा।
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