काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः।।
परम धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट तथा अपराजित सात्यकि ने भी अपने-अपने शंखों का नाद किया।
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