अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि।।
अतः आप सब, अपने-अपने नियत स्थानों(युद्ध-व्यूह के विभिन्न मोर्चों) पर स्थित होकर, सभी दिशाओं सेपितामह भीष्म की ही विशेष रूप से रक्षा करें।
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