माय बाप गुरू स्वामि राम कर नाम।
तुलसी जेहि न सोहाइ ताहि बिधि बाम॥
तुलसीदासजी कहते हैं - अरे मन! राम का नाम ही (तुम्हारे लिये) माता, पिता, गुरु और स्वामी है। जिसे यह अच्छा न लगे, उसके लिये विधाता प्रतिकूल है (जन्म-मरण के चक्र में भटकना ही उसके भाग्य में बदा है)।
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