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बरवै रामायण • अध्याय 7 • श्लोक 5
संकट सोच बिमोचन मंगल गेह। तुलसी राम नाम पर करिय सनेह॥
तुलसीदासजी कहते हैं – अरे मन! सब प्रकार के संकट एवं शोक को नष्ट करने वाले तथा सम्पूर्ण मंगलों के निकेतन श्रीराम-नाम से प्रेम करना चाहिये।
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