सवारथ परमारथ हित एक उपाय।
सीय राम पद तुलसी प्रेम बढ़ाय॥
तुलसीदासजी कहते हैं – अरे मन! स्वार्थ (लौकिक हित) तथा परमार्थ-(आत्मकल्याण) के लिये एक ही उपाय है कि श्रीसीतारामजी के चरणों में प्रेम बढ़ाओ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बरवै रामायण के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बरवै रामायण के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।