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बरवै रामायण • अध्याय 7 • श्लोक 3
सवारथ परमारथ हित एक उपाय। सीय राम पद तुलसी प्रेम बढ़ाय॥
तुलसीदासजी कहते हैं – अरे मन! स्वार्थ (लौकिक हित) तथा परमार्थ-(आत्मकल्याण) के लिये एक ही उपाय है कि श्रीसीतारामजी के चरणों में प्रेम बढ़ाओ।
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