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बरवै रामायण • अध्याय 7 • श्लोक 26
राम भरोस नाम बल नाम सनेहु। जनम जनम रघुनंदन तुलसी देहु॥
(प्रार्थना करते हुए गोस्वामी जी कहते हैं) हे रघुनाथजी! इस तुलसीदास को तो जन्म-जन्म में अपना भरोसा, अपने नाम का बल और अपने नाम में प्रेम दीजिये।
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