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बरवै रामायण • अध्याय 7 • श्लोक 2
पय नहाय फल खाहु परिहरिय आस । सीय राम पद सुमिरहु तुलसीदास॥
तुलसीदासजी कहते हैं – अरे मन! पयस्विनी नदी में स्नान करके फल खाकर रहो, सब प्रकार की आशाओं को छोड़ दो और (केवल) श्रीसीतारामजी के चरणों का स्मरण करो।
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