आगम निगम पुरान कहत करि लीक ।
तुलसी राम नाम कह सुमिरन नीक॥
तुलसीदासजी कहते हैं – तन्त्रशास्त्र, वेद तथा पुराण रेखा खींचकर (निश्चयपूर्वक कहते हैं कि) राम-नाम-स्मरण (सबसे) उत्तम है।
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