मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बरवै रामायण • अध्याय 5 • श्लोक 6
सरद चाँदनी सँचरत चहुँ दिसि आनि। बिधुहि जोरि कर बिनवति कुलगुरू जानि॥
जब शरदू-ऋतु के चन्द्रमा की चाँदनी प्रकट होकर चारों दिशाओं में (सब ओर) फैल जाती है, तब (वह श्रीजानकीजी को सूर्य की धूप के समान ऐसी उष्ण लगती है कि) चन्द्रमा को अपने कुल-(सूर्यवंश) का प्रवर्तक (सूर्य) समझकर हाथ जोड़कर (उससे) प्रार्थना करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बरवै रामायण के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बरवै रामायण के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें