राम सुजस कर चहुँ जुग होत प्रचार।
असुरन कहँ लखि लागत जग अँधियार॥
श्रीराम के सुयश का प्रचार चारों युगों में होता है, किंतु असुरों कों देखकर लगता है कि संसार में अँधेरा (अन्याय ही व्याप्त) है (अर्थात् इस समय श्रीराम का यश राक्षसों के अत्याचार में छिप गया है)।
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