रामवाक्य-
कनक सलाक कला ससि दीप सिखाउ।
तारा सिय कहँ लछिमन मोहि बताउ॥
(जानकी-हरण के पश्चात्) श्रीराम कहते हैं - 'लक्ष्मण! सोने की शलाका, चन्द्रमा की कला, दीपक की शिखा अथवा नक्षत्र के समान (ज्योतिर्मयी) सीता कहाँ है? मुझे यह बता दो'।
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