बाल्मीकि वचन-
द्वै भुज करि हरि रघुबर सुंदर बेष।
एक जीभ कर लछिमन दूसर सेष॥
महर्षि वाल्मीकीजी ने कहा – ‘सुन्दर वेषधारी श्रीरघुनाथजी द्विभुज विष्णु हैं और लक्ष्मणजी एक जिह्वा वाले दूसरे शेषनाग हैं’।
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