सजल कठौता कर गहि कहत निषादं।
चढ़हु नाव पग धोइ करहु जनि बाद॥
निषाद हाथ में जल भरा कठौता लेकर (प्रभु से) कहता है – ‘चरण धोकर नौका पर चढ़िये, तर्क-वितर्क मत कौजिये’।
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