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बरवै रामायण • अध्याय 2 • श्लोक 4
तुलसी भइ मति बिथकित करि अनुमान। राम लखन के रूप न देखेउ आन॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि (मार्गवासियों की) बुद्धि अनुमान करते-करते थक गयी। श्रीराम-लक्ष्मण के समान दूसरा कोई (देवतादि का) रूप नहीं दिखायी पड़ा।
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