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बरवै रामायण • अध्याय 1 • श्लोक 9
केस मुकुत सखि मरकत मनिमय होत। हाथ लेत पुनि मुकुता करत उदोत॥
(श्रीराम रूप का वर्णन करने के अनन्तर अब श्री जानकीजी के रूप का वर्णन करते हैं। जनकपुर की स्त्रियाँ परस्पर कह रही हैं) सखी! (श्रीजनककुमारी के) केशों में गूँथे जाने पर (उनका नीले रंग की झाईं पड़ने से) मोती मरकत मणि (पन्ने) के बने हुए (हरे) प्रतीत होते हैं, किन्तु फिर हाथ में लिये जाने पर वे श्वेत आभा बिखेरने लगते हैं।
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