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बरवै रामायण • अध्याय 1 • श्लोक 3
भाल तिलक सर सोहत भौंह कमान। मुख अनुहरिया केवल चंद समान॥
मस्तक पर तिलक की रेखा बाण के समान शोभा दे रही है और भौंहें धनुष के समान हैं। मुख की तुलना में तो अकेला (पूर्णिमा का) चन्द्रमा ही आ सकता है।
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