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बरवै रामायण • अध्याय 1 • श्लोक 2
कुंकुम तिलक भाल श्रुति कुंडल लोल। काकपच्छ मिलि सखि कस लसत कपोल॥
(अयोध्या के राजभवन की स्त्रियाँ कहती हैं) सखी! श्रीराम के ललाट पर केसर का तिलक है, कानों में चञ्नल कुण्डल हैं और जुल्फों से मिलकर गोल-गोल गाल कैसे सुशोभित हो रहे हैं।
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