नृप निरास भए निरखत नगर उदास।
धनुष तोरि हरि सब कर हरेउ हरास॥
समस्त नरेश (धनुष तोड़ने में असफल होकर) निराश हो गये। (इससे) पूरा नगर (समस्त जनकपुर वासियों का समुदाय) उदास दिखायी देने लगा। तब श्रीराम ने धनुष को तोड़कर सबका दुःख (चिन्ता) दूर कर दिया।
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