मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बरवै रामायण • अध्याय 1 • श्लोक 15
कमठ पीठ धनु सजनी कठिन अँदेस। तमकि ताहि ए तोरिहिं कहब महेस॥
(स्वयंवर सभा में जनकपुर की नारियाँ श्रीराम को देखकर परस्पर कह रही हैं) सखी! यही संदेह की बात है कि धनुष कछुए की पीठ के समान कठोर है। (तब दूसरी सखी कहती है) उसे ये बड़े तपाक के साथ तोड़ देंगे, स्वयं शंकरजी (अपने धनुष के टूट जाने को) कह देंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बरवै रामायण के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बरवै रामायण के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें