सिय मुख सरद-कमल जिमि किमि कहि जाइ।
निसि मलीन वह निसि दिन यह बिगसाइ॥
श्रीसीताजी का मुख शरद-ऋतु के कमल के समान कैसे कहा जाय, क्योंकि वह (कमल) तो रात्रि में म्लान होता है, किंतु यह (श्रीमुख) रात-दिन (समान रूप से) प्रफ्फुल्लित रहता है।
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