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अवधूत • अध्याय 1 • श्लोक 7
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः ॥
अमरत्व की प्राप्ति न तो विविध कर्मों के द्वारा, न प्रजा के द्वारा और न ही धन के द्वारा होती है। एकमात्र त्याग के द्वारा ही अमरत्व की प्राप्ति की जा सकती है।
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