उस (योगी) का प्रिय(ब्रह्म) ही सिर है, 'मोद' उसका दायाँ बाजू, 'प्रमोद'बायाँ बाजू तथा 'आनन्द' उसकी मध्य आत्मा है।
उसकी (आत्मा की) स्थिति गाय के पैर के सदृश (चार— प्रिय, मोद, प्रमोद एवं आनन्द रूप) हो जाती है।
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