हे परमात्मन्! आप हम दोनों (गुरु-शिष्य) की साथ-साथ रक्षा करें।
हम दोनों का साथ-साथ पालन करें। हम दोनों साथ-साथ शक्ति अर्जित करें। हम दोनों की पढ़ी हुई विद्या तेजस्वी (प्रखर) हो। हम दोनों एक-दूसरे के प्रति कभी ईर्ष्या और द्वेष न करें।
हे शक्ति सम्पन्न!(हमारे)त्रिविध(आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक)तापों का शमन हो तथा अक्षय शान्ति की प्राप्ति हो।
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