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अवधूत • अध्याय 1 • श्लोक 35
अहो पुण्यमहो पुण्यं फलितं फलितं दृढम् । अस्य पुण्यस्य संपत्तेरहो वयमहो वयम् ॥
अहो पुण्य! अहो पुण्य!! इस पुण्य की सफलता दृढ़तापूर्वक फलीभूत हुई है। धन्य हैं हम सब।
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