मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
अवधूत • अध्याय 1 • श्लोक 28
देवार्चनस्नानशौचभिक्षादौ वर्ततां वपुः। तारं जपतु वाक्तद्वत्पठत्वाम्नायमस्तकम् ॥
देवताओं की स्तुति-अर्चना, भोजन, शौच, शिक्षा आदि में शरीर भले ही लगा रहे। वाणी ॐकाररूपी प्रणव का भले ही जप करती रहे तथा उपनिषदों का पाठ भले ही होता रहे—
पूरा ग्रंथ पढ़ें
अवधूत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

अवधूत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें