येऽत्राधिकारिणो मे तु नाधिकारो ऽक्रियत्वतः ।
निद्राभिक्षे स्नानशौचे नेच्छामि न करोमि च ॥
किन्तु मुझे तो इसका अधिकार ही नहीं; क्योंकि मैं निष्क्रिय(क्रियारहित) हूँ।
मैं निद्रा, भिक्षा, भोजन अथवा शौच आदि की तनिक भी इच्छा नहीं करता।
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