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अवधूत • अध्याय 1 • श्लोक 14
तदेव कृतकृत्यत्वं प्रतियोगिपुरःसरम् । दुःखिनोऽज्ञाः संसरन्तु कामं पुत्राद्यपेक्षया ॥
(इसके पश्चात् वह ध्यान करता हुआ कहता है) अज्ञानीजन पुत्रादि की इच्छा से अत्यन्त दुःखी होकर संसार के आवागमन में फँसते रहे।
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