जगत् का असत्य(मिथ्या) रूप में बोध होना ही संसार की निवृत्ति का कारण बनता है।
जिस प्रकार "यह घट है"—इसका ज्ञान प्राप्त करने के लिए किसी विशेष नियम या प्रमाण की अपेक्षा नहीं होती, उसी प्रकार यथार्थ तत्त्वज्ञान होने पर संसार का मिथ्यात्व स्वतः ही स्पष्ट हो जाता है।
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