मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्म • अध्याय 1 • श्लोक 4
अथ परमात्मा नाम यथाक्षर उपासनीयः । स च प्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधियो गानुमानाध्यात्मचिन्तकं वटकणिका वट श्यामाकतण्डुलो वा वालाग्रशतसहस्त्रविकल्पनाभिः | स लभ्यते नोपलभ्यते न जायते न म्रियते न शुष्यति क्लिद्यते न दह्यति न कम्पते न भिद्यते न । च्छिद्यते निर्गुणः साक्षीभूतः । शुद्धो निरवयवात्मा केवल: सूक्ष्मो निष्कलो निरञ्जनो निर्विकारः शब्दस्पर्शरूपरसगन्धवर्जितो निर्विकल्पो निराकाङ् क्षः सर्वव्यापी सोऽचिन्त्यो निर्वर्ण्यश्च पुनात्यशुद्धान्यपूतानि । निष्क्रियस्तस्य संसारो नास्ति ॥
परमात्मा नाम से सम्बोधित अक्षर (अविनाशी या ॐकार रूप में ) आराध्य है। वह (परमात्मा) प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि, योग, अनुमान, आत्मचिन्तन आदि के द्वारा; वट कणिका (वट वृक्ष के सूक्ष्म बीज), श्यामाक-तण्डुल (सावाँ के सूक्ष्म चावल) तथा अत्यन्त सूक्ष्म बाल के अग्रभाग के सैकड़ों-हजारों हिस्सों से भी अति सूक्ष्म; इस प्रकार से चिन्तन किया जाता हुआ प्राप्त भी होता है और नहीं भी होता है। वह न कभी प्रकट होता है और न ही मरता है, न शुष्क होता है, न आर्द्र होता है, न चलायमान है, न कम्पन करता है, न टूटता है, न स्थिर रहता है, वह तो गुणों से रहित, सर्व प्रमाण भूत, शुद्ध स्वरूप, अवयवरहित आत्मा केवल, सूक्ष्म, निर्मल, निरंजन, विकारहीन, शब्द, स्पर्श, रूप, रस एवं गन्धहीन, ज्ञान से रहित, कल्पना रहित, आकांक्षा से रहित, सर्वत्र व्याप्त, अचिन्त्य एवं इस प्रकार का परमात्मा है कि जिसका ठीक-ठीक ज्ञान नहीं किया जा सकता। (वह) अशुद्ध-अपवित्र को शुद्ध-पवित्र करता है, वह क्रियारहित है, उस परमात्मा का कोई संसार नहीं है अर्थात् संसार रहित है। (संसार का अर्थ - संसरति इति संसारः - गतिशील या परिवर्तनशील होता है। परमात्मा एक रूप रहने वाला होने से उसका कोई समरण नहीं होता; इस भाव से उसे संसार रहित कहा गया है। अगले मन्त्रों में उस आत्म तत्व का स्वरूप दृष्टि होने पर सब जगह उस परमात्मतत्त्व-ब्रह्म के ही भासित होने की बात कही गई है।)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्म के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आत्म के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें