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आत्म • अध्याय 1 • श्लोक 21
पश्यन्ति देहिवन्मूढाः शरीराभासदर्शनात् । अहिनियनीवायं मुक्तदेहस्तु तिष्ठति ॥
मूढ़ लोग, शरीर के आभास को देखकर, उस ब्रह्मज्ञानी को देहधारी समझते हैं। किन्तु वास्तव में वह देहबन्धन से मुक्त होता है। वह त्यागी हुई केंचुली के समान (अहिनिर्मोकिनीव) इस शरीर में स्थित प्रतीत होता है, परन्तु उससे सर्वथा असंग रहता है।
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