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आत्म • अध्याय 1 • श्लोक 12
तद्वद्ब्रह्मविदोऽप्यस्य ब्राह्माहमिति वेदनम्। भानुनेव जगत्सर्वं भास्यते यस्य तेजसा ॥
उसी प्रकार ब्रह्म को जानने वाले का ब्रह्माहम् (मैं ब्रह्म हूँ) ऐसा समझना ही ब्रह्म का साक्षात्कार (प्रत्यक्षानुभूति) है। जिस तरह सूर्य से सम्पूर्ण जगत् प्रकाशित होता है, उसी तरह ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उस ब्रह्म के तेज से प्रकाशित होता है
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