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अष्टावक्र गीता • अध्याय 9 • श्लोक 4
कोऽसौ कालो वयः किं वा यत्र द्वन्द्वानि नो नृणां। तान्युपेक्ष्य यथाप्राप्तवर्ती सिद्धिमवाप्नुयात्॥
ऐसा कौन सा समय अथवा उम्र है जब मनुष्य के संशय नहीं रहे हैं, अतः संशयों की उपेक्षा करके अनायास सिद्धि को प्राप्त करो।
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